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Showing posts from May, 2012

जेपी थर्मल प्लांट बघेरी पर एक खुला पत्र

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गुमान सिंह, संयोजक, हिमालय नीति अभियान

प्रिय साथियों, जेपी थर्मल प्लांट बघेरी पर मुझे सब के नाम यह पत्र इसलिए लिखना पड़ रहा है क्योंकि आज कल हिमाचल के हिन्दी और अंग्रेजी अखवारों में बयानबाज़ियों का भूचाल सा आ गया है. ये सभी राजनीतिक वक्तव्य पिछले पांच साल पुराने आंदोलन के दौरान कहीं नहीं दिखे. इसलिए मैंने यह अपनी भुक्तभोगी जानकारी सब के साथ बांटने के लिए लिखा है. हिमाचल हाईकोर्ट ने जेपी एसोसिएट्स के बघेरी थर्मल संयंत्र पर एक अभूतपूर्व निर्णय दे कर यह आभास कराया है कि प्रदेश में संसाधनों की कॉरपोरेट लूट मची है और इस काम में यहां के राजनेता-अधिकारी वेशर्मी से शामिल हैं. हाईकोर्ट ने दूसरी बार इस परियाजना को वर्तमान मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी पर भी सवाल उठाया. यह भी पिछले कुछ बर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी बड़े कॉरपोरेट को भूमि, वन और पर्यावरण के कानून तोड़ने पर एक सौ करोड़ से ज्यादा का जुर्माना हुआ. निर्मित ढांचे को तोड़ने का आदेश और कानूनी हेराफेरी करने वाले अधिकारियों व संस्थाओं की जांच का आदेश दिया गया. वेदान्ता, पॉस्को, लवासा से ले कर देश में बन रही तमाम परमाणु ऊर्जा …

तो जल विद्युत परियोजनाएं चलवाने के लिए ताजपोशी हुई है बहुगुणा की !

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ऐसा लग रहा है कि तमाम रोने-धोने, नाराजी और मान मनौवल के बाद अन्ततः विजय बहुगुणा के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की नई सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन चीजें एकदम जिस तरह शुरू हुई हैं, उससे आगे के लिये उम्मीद जगने के बदले एक भय लगने लगा है। सबसे पहले एक ऐसे व्यक्ति की एडवोकेट जनरल के पद पर नियुक्ति, जिसकी मुजफ्फरनगर कांडके आरोपी अनन्त कुमार सिंह के दोषमुक्त होने में संदिग्ध भूमिका थी। फिर स्थायी राजधानी के लिये देहरादून के नाम का उछलना और फिर सड़ा-गला, एक जैसा भी भू कानून था, उसे भू माफिया के पक्ष में संशोधित करने की पहल होना। ये सारी बातें अच्छे भविष्य की ओर संकेत नहीं करतीं।
पदभार ग्रहण करते ही जिस तरह मुख्यमंत्री बाँध निर्माता कम्पनियों के पक्ष में खड़े हुए हैं, उससे तो लगता है कि उनकी ताजपोशी इसीलिये हुई है कि जल विद्युत परियोजनायें फटाफट बनें। हिमालय में अविरल बहते पानी से बिजली बनाने का विरोध कोई भी समझदार व्यक्ति नहीं करेगा। लेकिन यह बात तो समझी ही जानी चाहिये कि ये परियोजनायें पर्यावरण को कितना नुकसान कर रही हैं, अपने अस्तित्व को बचाने के लिये बेचैन क्षेत्रीय…

कुशावर्त घाट (हर की पैड़ी) : बेच दी रानी की निशानी

एसएन चौधरी
इंदौर रियासत के होल्कर घराने की महारानी अहिल्याबाई होल्कर की हरिद्वार के पौराणिक कुशावर्त घाट स्थित निशानी ‘होल्कर बाडा’ को बेच दिया गया। यही नहीं, रानी की निशानी की देखरेख करने वाले मध्य प्रदेश सरकार के अधीन ट्रस्ट ने नागा संन्यासियों के आराध्य भगवान दत्तात्रैय की तपस्थली कुशावर्त घाट के चबूतरे का भी सौदा कर दिया। 2009 में ट्रस्ट की ओर से सचिव सतीश चंद्र मल्होत्रा ने निकेता सिखौला और अनिरुद्ध कुमार के नाम इन संपत्तियों का बैनामा कर दिया। रानी की अनमोल निशानी को बेचने के बाद नाम परिवर्तन के लिए नगर निगम हरिद्वार में आवेदन किया गया। नाम परिवर्तन के दौरान आई आपत्तियों को भी अधिकारियों की मिलीभगत से निरस्त कर दिया गया। नाम परिवर्तन की खबर लीक होने पर प्रशासन हरकत में आया और उसने नगर निगम के लेखाधिकारी को एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों की टीम इसकी जांच कर रही है। जिला प्रशासन ने मध्य प्रदेश सरकार को भी इस मामले से अवगत करा दिया गया है।
ज्ञात हो कि भगवान शिव की अन्नय भक्त महारानी अहिल्याबाई ने करीब 250 साल पहले हरिद्वार यात्रा के दौरान पौराणिक कु…