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ताकि बिहारी और पहाड़ी को गाँव में ही मिल जाये दिहाड़ी

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ग्रामीण विकास विभाग द्वारा एक विज्ञप्ति में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य उपलब्धता में सुधार का अनुमानित लेखा जोखा पटल पर रखा गया। रोजगार की किल्लत दूर करने के लिए विभाग का जोर सड़क निर्माण क्षेत्र पर है| सरकार कुशल, अर्द्धकुशल दिहाड़ी मजदूर को पीएनएवाई-ग्रमीण तथा पीएनजीएसवाई के अंतर्गत  में अस्थायी रोजगार का प्रोत्साहन दे रही है। इसके चलते ग्रामीण विकास कार्यों के लिए मौजूदा बजट 2012-13 के ग्रामीण विकास विभाग के बजट के दोगुने से अधिक हो गया है। 14वें वित्त आयोग और राज्य के योगदान को जोड़ दिया जाए तो सभी कार्यक्रमों और रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी खर्चे के लिए मौजूद धन 5 वर्षों की तुलना में तिगुना से अधिक हो जाता है। इसी खर्चे से 51 लाख मकान निर्माणाधीन हैं, एक लाख किलोमीटर सड़कें निर्माण के विभिन्न चरणों में है| कृषि तथा संबंधित गतिविधियों के लिए मनरेगा के अंतर्गत बड़े स्तर पर दिहाड़ी रोजगार के अधिक अवसर सुनिश्चित हुए हैं। हालाँकि इन विकास कार्यों के रोजगार अस्थायी हैं और खानाबदोशी को बढ़ावा देने वाले हैं, 
दीन दयाल अंत्योदय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएन) के अंतर्गत महिल…

कौन कौन मिलने वाले हैं मुख्यमंत्री योगी से

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उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री भारत देश के पांचवें हिस्से का सबसे अहम् किरदार है| इस लिहाज से देश ही नहीं दुनिया के लिए भी खास अहमियत रखता है| लेकिन शायद इस बार कद और ज्यादा बढ़ रहा है| अमेरिकी और ब्रिटिश कंपनियों में बोइंग, मेर्क, प्रैट एंड व्हिटनी, मेडट्रोनिक, एडोबी, कोकाकोला, उबेर, हनीवेल, प्रॉक्टर एंड गैम्बल और कारगिल दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों के मुखिया योगीजी से मिलने को बेक़रार हैं| इनके प्रतिनिधि योगीजी से मिलकर निवेश के अवसरों पर चर्चा करेंगे| प्रदेश के प्रमुख सचिव राजीव कुमार इसके बारे में बताएँगे कि सरकार इन विदेशी फर्मों के लिए क्या सहूलियतें मुहैया कराने जा रही है| मीटिंग में अमेरिकी दूतावास और यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी के अधिकारी भी शामिल होंगे|  इन बैठकों के सिलसिले कोई नयी बात नहीं लेकिन इसमें दो अहम् बिंदु हैं, पहला है यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम और दूसरा प्रदेश सरकार की इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पालिसी| इन्ही के मार्फ़त मेडिकल क्षेत्र की अमेरिकी कंपनियों को बुलावा दिया जा रहा है| जीई हेल्थकेयर, मर्क शार्प, एमएसडी और मेडट्रोनिक ने प…

तीन टन प्लास्टिक लेकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं गंगा और ब्रह्मपुत्र

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एक अध्ययन में बात सामने आई है कि 90 प्रतिशत प्लास्टिक कचरा समुद्रों में पहुँचाने का काम नदियाँ कर रही हैं| शहरों में कूड़े खास कर प्लास्टिक की वाजिब व्यवस्था न होने के चलते नदियाँ पहले से ही प्रदूषित थीं अब उनका प्रदूषण समुद्रों के लिए भी चुनौती बन रहा है| दुनिया भर के आंकड़ों को इकठ्ठा करके जर्मन वैज्ञानिकों ने जो अध्ययन किया है उसक]में एशिया और अफ्रीका के नतीजे ज्यादा चिंताजनक बताये गए हैं| बताया जा रहा है कि चार लाख टन से चालीस लाख टन के बीच प्लास्टिक कचरा हर साल समुद्र में पहुँचता है| इस कचरे का नब्बे प्रतिशत प्रतिशत हिस्सा एशिया की आठ और अफ्रीका की दो नदियों से होकर समुद्र में पहुंचता है| इस अध्ययन में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि चीन की येल्लो रिवर के कैचमेंट एरिया में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की सबसे भारी दुर्दशा है| येल्लो समुद्र में गिरने वाली ये नदी अपने पेट में सोलह मिलियन टन प्लास्टिक भरकर समुद्र में पहुंचाती है| उन्ही के अध्ययन में ये बात भी सामने आई है कि गंगा ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के कैचमेंट से तीन मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र में पहुँचती है| ये तीनों नदियाँ बंगाल की खा…

गंगा के लिए अनशनकारियों पर उत्तराखण्ड पुलिस का कहर, हत्या की आशंका जताई

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ताजा खबर है कि हरिद्वार  की गंगा में अवैध खनन को लेकर उत्तराखण्ड सरकार ने अनशन पर बैठे  स्वामी  शिवानन्द और  ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के विरुद्ध पुलिस बल का प्रयोग किया है| मातृ सदन आश्रम के शिष्यों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने आश्रम में तोड़-फोड़ की कार्रवाई की और ज्यादती भी की है| शिष्यों को पुलिसिया कार्रवाई में  स्वामीजी की हत्या की भी आशंका है|  
गौरतलब है कि  मातृ सदन आश्रम भ्रष्टाचार और पर्यावरण की धांधलियों के लिए अदालत तक की कानूनी लड़ाई लड़ी है| स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद भी हरिद्वार के मातृ सदन मे अनशन कर चुके हैं| आश्रम द्वारा जारी किये गये एक बयान मे आरोप लगाया गया है कि सरकार ने वर्ष 2006 के पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट की अवहेलना करके काम किया| इतना ही नहीं खनन करने के विरुद्ध तपस्यारत स्वामी निगमानंद सरस्वती जी की हत्या भी करवाई दी| बयान में आशंका जताई गयी है की सरकार मातृ सदन के दूसरे संतों की हत्या की साजिश कर रही है| आश्रम की वेबसाइट पर जारी किये गए बयान में मातृ सदन ने  अपील की है  कि लोग सत्ताधारी पार्टी के असलियत को समझें| आश्रम संचालकों ने दावा किया है कि खनन के खिलाफ अन…

मोदी सरकार बना रही है विकास का हरित मार्ग

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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने पिछले तीन वर्षों के दौरान हरित मार्ग के माध्‍यम से सतत विकास अर्जित करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। वन : राष्‍ट्रीय वन नीति के उद्देश्‍यों के अनुरूप एमओईएफसीसी ने वन आच्‍छादन को बढ़ाकर  भौगोलिक क्षेत्र के 33 प्रतिशत तक करने के लिए रूपरेखा बनाई है। हरित भारत मिशन का लक्ष्‍य वन गुणवत्‍ता तथा 5 मिलियन हेक्‍टेयर को कवर करने के वार्षिक लक्ष्‍य के साथ बंजर भूमि का पुनर्वनीकरण करना है। घटते वन आच्‍छादन की समस्‍या पर विचार करने तथा विकास उद्देश्‍यों के लिए काटे गए वनों की क्षतिपूर्ति के लिए 2016 में संसद में क्षतिपूर्ति वनीकरण विधेयक पारित किया गया जिसे कि 42,000 करोड़ रूपये का उपयोग किया जा सके। इस निधि का संग्रह उन वनों से प्राप्‍त वसूलियों से किया गया था जिनका उपयोग गैर वन उद्देश्‍यों के लिए किया गया था। यह एक पार‍दर्शी तरीके से वनों के संरक्षण, बेहतरी के लिए निधियों के उपयोग को सुगम बनाता है। केंद्र सरकार ने विभिन्‍न वन कार्यकलापों को महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना के साथ अभिसरित करने के लिए कदम उठाए हैं। इससे …

सरकारी बयान: NSSO की रिपोर्ट का ठीक से अध्‍ययन करें पत्रकार

स्वच्छता और आंकड़ों के विषय में नीति निर्माताओं और पत्रकारों की आम राय नहीं बन सकी| पत्रकारों द्वारा लिखी रिपोर्टों को भ्रामक और असत्य मानते हुए सरकार ने एक बयान जारी करके कहा है कि पत्रकार पढ़ लिख कर विवेचन करके सरकारी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दें|    सरकार का कहना है कि एनएसएसओ (राष्‍ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन) द्वारा  कराए गए तीव्र स्‍वच्‍छता सर्वेक्षण के निष्‍कर्षों को मीडिया ने गलत तरीके से उद्धरित किया गया है साथ ही साथ गलत निष्‍कर्ष निकाले गए हैं। इतना ही नहीं, जारी किये गए एक सरकारी बयान में कहा "मीडिया की इन खबरों में निकाले गए निष्‍कर्ष न केवल तथ्‍यात्‍मक दृष्टि से गलत हैं, बल्कि उनकी व्‍याख्‍या भी  गलत तरीके से की गई है"।  सरकारी बयान में इस्‍तेमाल कर्ताओं से अपेक्षा की गयी है कि वे परिशिष्‍टों सहित, स्‍वच्‍छता स्थिति रिपोर्ट का, विशेष रूप से 'कन्‍सेप्‍ट्स और डेफिनेशन्‍स' यानी 'अवधारणाओं और परिभाषाओं का विस्‍तार से अध्‍ययन करें, ताकि उसके निष्‍कर्षों को सही सही और पूर्ण रूप से समझा जा सके। साथ ही साथ सरकार ने जरुरी माना है कि सभी सम्‍बद्ध पक्षों को तथ्‍यों…

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में एक प्रतिशत की कमी आई

18 मई, 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 35.622 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 23 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 123 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 104 प्रतिशत है। 11 मई को समाप्त हुए सप्ताह के अंत में यह 24 प्रतिशत थी।
   इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।
                             क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति

उत्तरी क्षेत्र
उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.25 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 24 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों…